Book Review :
अंगेंस्ट द मैडनेस ऑफ़ मनु ब्राह्मण पितृसत्ता पर बी.आर.अम्बेडकर की राइटिंग्स
ISBN No. : 9788189059538
शर्मिला रेगे
Reviewed By : निखिल अगर्वाल
Published On : 04/04/2014
Published By : Navayana प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड 155, दूसरी मंजिल, शाह पुर जाट, नई दिल्ली
Genre : Literary Critisism

Review :

इस किताब में शर्मिला रेगे ने अम्बेडकर जी के द्वारा ब्राह्मणवाद और पितृसत्ता समाज की संरचना को मनु का पागलपन कहा हे जो कि इस पुस्तक के नाम से भी स्पष्ट हे.अम्बेडकर जी ने महिलाओ पर जो विचार अपने लेखो में दिए हे उसका वर्णन करते हुए लेखिका ने मनु के विचारो को गलत साबित किया हे क्योकि मनु द्वारा निर्मित जटिल नियम, परम्पराए,ब्रह्मणो का वर्चस्व एवं पितृसत्तात्मक समाज द्वारा मानव समाज में महिलाओ के साथ कुरुरता तथा जटिलता का प्रयॊग होता आ रहा हे. इस पुस्तक को लेखिका ने तीन भागो में बाटा हे जिसमे अलग–अलग महतवपूर्ण तथ्यो का वर्णन किया हे. प्रथम भाग में लेखिका ने ब्रह्मणो की परिषदों व समेलनो को प्रमुख महत्व दिया हे तथा द्रितीय भाग-में दलित व गेर-दलित नारियो की सामाजिक स्तिथियों का वर्णन हे तो वही तृतीय भाग-में वर्त्तमान राजनीती में क्रियान्वित दलित महिला के रपे व प्रतिपूर्ति के तर्क शामिल हे. लेखिका ने सन 2009 में हुए पुणे समेलन का वर्णन किया हे और बताया हे की इस समेलन में ब्रह्मणो ने ब्राह्मणवादी समुदायो के संरक्षण के लिए अपने समुदायो के भीतर शादी विवाह करने की सलाह दी हे तथा महिलाओ के कपडे पहनने के तरीको के साथ ही महिलाओ की परिवार व समुदायो के प्रति भी जिमेवारी निर्धारित की है. महिलाओ पर हुए बलात्कार एवं उसकी प्रतिपूर्ति को ऊॅच जlति व निम्न जाति मानसिकता से जोड़ा है अर्थात यह वर्णन किया है की किस प्रकार दलित व निम्न जातीय महिला आपने को शोषण का सlधन मlन मानसिकता निर्धारित करती है जिसका आधार लेखिका ने मनुवादी संरचना को मlनl है क्योकि मनु महिलाओ को वेद पड़ने एवं पूजा-पाठ के कार्यो के लिए उनुपयुक्त समझते हुए उन्हें मात्र गृह कार्यो तक सिमित रखना चाहते थे जो कि महिलाओ के प्रति अन्याय है. आंबेडकर जी ने स्वयं कहा हे - " एक पुरुष को शिक्षा देने का अर्थ हे एक व्यक्ति को शिक्षा देना परन्तु एक महिला को शिक्षा देने का अर्थ हे पुरे परिवार को शिक्षा देना ".आंबेडकर महिलाओ कि स्व्तन्त्रता के बड़े समर्थक थे तथा अम्बेडकर स्वयंहिन्दू कोड बिल कि नीव राखी गए थीं और जाति आधारित प्रितसतात्मककानूनो को चुनौती दी. आंबेडकर जी के लेखो को तीन भागो में बाटा गया हे. 1- जाति अंतर्विवाह के रूप में अर्ताथ जाति और महिलाओ के प्रतिहिंसा पर जोर दिया हे 2- एक से जादा पत्निया रखने पर महिलाओ के प्रतिहिंसा का वर्णन हे.जिसमे RIDDLE NO - 18 व् 19 का वर्णन हे जिसमे राम व् कृषण ने महिलाओ को सुख भोग का सIधन माना है. 3- हिन्दू कोड बिल के विकास व् पतन का वर्णन है. ये निम्न है. प्रथम भाग -- जाति अंतर्विवाह के रूप में-- जाति व् महिलाओ के प्रति हिंसा का बेहतर वर्णन है कि कैसे जाति के आधार पर महिलाये हिंसा से पीड़ित है.ब्रह्मणो द्वारा अंतरजातीयविवाह का पुरजोर समर्थन के कारण कठोर नियमो का निर्माण किया गया जिसमे महिलाओ के प्रतिहिंसा और बड़ीहै.लेखिका जाति को जन्मजात मानती है इसीलिए जाति आधारित हिंसा को नकारती है.आंबेडकर जी विचारो में ब्रह्मणोद्वारा निर्मित प्रितसत्तात्मक समाज कि संरचनाओ में सामाजिक हिंसा का प्रमुख कारण ब्रह्मणो द्वारा निर्मित व्ययवस्था को मानती है.लेखिका सती प्रथा, बाल विवाह आदि प्रथाओ के समर्थन का कारण सांस्कृतिकमान्यताओ को ही मानती है.जोकि महिलाओ के प्रती हिंसा को बडावा देती है. ऍम .एस.गोरेभी बहुविवाह को हिंसा का कारण मानती है.लेखिका जाति एवं नसल जैसे आर्यन व् गेर आर्यन , उपनयन संस्कार द्वारा शुद्धिकरण को भी शोषणकारी बताती है.आंबेडकर जी ने- “THE RISE AND FALL OF HINDU WOMEN” में महिलाओ कि स्थिति का एतेहासिक वर्णन किया है कि बुध संघ में सभी परकार कि महिलो को शामिल होने, पूजा पाठ करने का अधिकार प्राप्त था जबकि मनुवादी व्यवस्था में हिन्दू महिला को घर कि चार दिवारी ही नसीब थीं.मनु पतिवर्तता एवं आद्रशवादी महिला को ही नारी मनते थे अन्य को गेर भरोसेमंद व अशुद्ध मनते थे. भारत में जातियो कि कार्यप्रणाली, उत्पत्ति एवं विकास के अंतर्गतः लेखिका कहती है कि हिन्दू धर्म में लोग मुश्किल से है अपनी जाति के बहार विवाह करते है.ये विवाह उन्ही लोगो के बीच होते है जिनका रहन सहन,भोजन, व्यापार, विचार एक जैसे होते है.इसी के कारण जातिवाद पनपता है.लेखिका इसे “ जाति आधारित पर्दूषण ” कहती है.लेखिकाजाति के अंदर विवाह ENDOGAMY को जाति के निर्माण व विकास का प्रमुख कारण बताती है.लेखिका बाल विवाह का कारण बताती है कि कही लडकी किसी के प्यार,आकर्षण में न पड़ जाये जोकि पाप है इसीलिए बाल विवाह को लोग सही ठहराते है.मनु काआद्रशवादी महिला का विचार ही महिलाओ केप्रतिहिंसा का प्रमुख कारण है. THE RISE AND FALL OF THE HINDU WOMEN- WHO WAS REPONSIBLE FOR IT- में लेखिका महिलाओ कि स्थितियों कि तुलना बुध व हिन्दू धर्म मेंकरती है और बताती है की बुध धर्म में सोन्दर्ये के आधार पर मन प्रलोभन नहीं हुआ जबकि हिन्दू धर्म में कृष्ण की 16,108 रानियाँ थीं.लेखिका ये भी कहती हे कि बुध धर्म में महिलाओ को अलग सिर्फ ब्रमचर्ये के पालन के लिए रखा जाता था न कि असमानता के लिए.स्वयं महात्मा बुध ने राजा परशनजीत को उपदेश दिया कि लड़की के जनम होने पर लड़की को भार न समझे बल्कि इनकी परिवार व समाज में विशेष भूमिका है.बुध धर्म में महिलाओ को पूजा पाठ आदि कि सवतंत्रता थी जोकि हिन्दू धर्म में महिलाओ को नहीं थी. पतंजलि महाभासये में महिला शिक्षा को विशेष महतत्व दिया है कि महिलाये स्वयं शिक्षा प्राप्त कर अध्यापक बन अन्य लडकियो को शिक्षादे सकती है.शंकराचार्य ने भी कहा है कि मनु से पहले महिलाये शिक्षा में काफी आगे थी इसलिए महिलाओ कि शिक्षा एवं स्व्तन्त्रता कोपर विशेष महत्व देना होगा जबकि मनु ने महिलाओ को जीवन को आश्रित बनाया है जिसमे बचपन पिता के आधीन, जवानी पति के आधीन , बुडापा बच्चो के आधीन इसे लेखिका महिलाओ का शोषण कहती हैजिसमे नारी सव्तंता है ही नहीं. भाग 2 -- महिलाओ के प्रति उनसुलझी पहेली कहा है जिसमे " THE RIDDLE OF RAMA AND KRISHNA" के चयनित भागो को शामिल किया गया है.विवाह के अनुलोम विवाह व प्रतिलोम विवाह के अंतर्गतः विभिन प्रकारो के विवाह का वर्णन किया है. यह भी बताया है की यदि माता पिता एक ही वर्ण के न हो तो बच्चा किस वर्ण का होगा.आंबेडकर जी ने "ANNIHLATION OF CASTE" में जाति प्रर्था के उन्मूलन एवं जाति आधारित भेदभाव को समाप्त करने पर जोर दिया है.अम्बेडकर जी ने राम की आलोचना की है क़ि राम ने सीता जैसी पतिवर्ता व पवित्र नारी की आग्नि परीक्षा ली तथा सीता को जनता के कहने पर लज्जित समझ त्याग दिया और अग्नि परीक्षा ले उनका आपमान किया.कृष्ण ने 16,108 रानियों जोकि कायस्थ जाति से थीं को अपने सुख का साधन माना जोकि उन्होंने युद्ध में जीती थीं उन्हें अपने सुख व शक्ति का साधन माना और प्रेम कीड़ा की जबकि गोपिया व राधा यादव जाति से थीं तो .कृष्ण ने विवाह यादव जाति के भीतर किया क्योकि कृष्ण यादवो में ही पले बड़े थे.अत: कृष्ण ने भी निम्न जाति की महिलाओ को सुख का सIधन मात्र माना.यहा स्पष्टहोता है निम्न जाति की महिलाओ से शारीरिक तृप्ति तो कीगई परतु विवाह अपनी ही जाति के बिहतर किया गया. RIDDLE NO 18- में आंबेडकर मिश्रित जातियो के उद्भव की बात करते है की यदि पिता किसी जाति का है तथा माता किसी जाति की है तो वह मिश्रित जाति क्या कहलायेगी.इसका इस भाग में विस्तार से वर्णन है. RIDDLE NO 19- इसमें प्रितसतIत्मक समाज से मातृसत्तात्मक समाज का वर्णन है जिसमे विभिन शादियों के प्रकारो का वर्णन है तथा अलग अलग जातियो के लोगो के आपसी विवाह पर उत्पन बच्चो की जाति का वर्णन है.महिलाओ का सम्पति में हक़ की बात की गई है औरकृष्ण की रानियाँ जो अपने विभागो की अध्यक्षक थीं वे निर्णय लेकर मातृत्त्व के सुख को भोगती थीं.सीता द्वारा लव ,कुश को स्वयं पलना मत्सातात्मक समाज का महतवपूर्ण कदम था . भाग 3-- हिन्दू कोड बिल के बारे में बताया गया है जिसमे हिन्दू कोड बिल को विवाह की वैधता देने वाला बताया गया है जिसमे तलाकशुधा महिला को पति व पिता की सम्पति में हक़दार बनाने की मांग की गई है .स्मृतियों के अंतर्गतः महिलाओ को ही स्त्रीधन माना गया है.रूढ़िवादी हिन्दुओ ने हिन्दू कोड बिल का विरोध किया है ताकि महिलाये निम्न स्थिति में ही रहे. आंबेडकर महिलाओ के सामान अधिकार के पक्षधर थे रूढ़िवादियों ने हिन्दू कोड बिल का इतना विरोध किया की आंबेडकर जी को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा.महिलाओ को सम्पति के अधिकार 1937 के तहत गुजरे भत्ते का प्रावधान किया गया है.इस बिल में गोत्र के अंदर विवाह करने में कोई दिक्कत नहीं है.इसमें जाति उन्मूलन को विवाह की वैधता के लिए आवश्यक बताया गया है.साथ ही एक विवाह व तलाक का प्रावधान किया गया है. पद्धति -लेखिका द्वारा आलोचनात्मक पद्धति,विश्लेषणात्मक पद्धति,तुलनात्मक पद्धति का पर्योग किया गया है.इसमें आंबेडकर के मूल स्रोतो का पर्योग प्राथमिक स्रोत के रूप में किया गया है.प्रितसतत्मक समाज में नारी की स्तृतीयो का वर्णन किया है.साथ ही अंतरजाति विवाह व बहिजाति विवाह का वर्णन किया है की किस परकार महिलाये इससे परभावित होते है. आलोचना-- 1- हिन्दू कोड बिल का जिक्र जब हुआ तब गोत्र के अंदर विवाह को मंजूरी दे दी जबकि गोत्र के अंदर विवाह हिन्दू धर्म में उपयुक्त नहीं है और एक गोत्र के बच्चे भाई- बेहेन मIने जाते है.आये दिन ऐसे मुद्दो को लेकर खाप पंचायत डारा ऑनर किल्लिंग के मुद्दे सामने आते है जिसको लेखिका ने शामिल नहीं किया है. 2 -जहाँ लव मैर्रिज होती हैवहाँ घर वालो द्वारा मजबूरन शादियां करा दी जाति है और अंतर जातिय विवाहके नियमो का उलन्घन होता है इसको लेखिका ने अनदेखा किया है. निष्कर्ष- यह पुस्तक भारतीय नारियो की हिंदूवाद व बुधवाद के समय में उनकी स्तृतीयो, उनके प्रती हिंसा तथा अलग अलग जातियो के बारे में विस्तृत वर्णन करती है.मिश्रित जाति द्वारा उत्पन शिशु के नIमो व उनकी जाति आदि का विस्तार से वर्णन किया गया है .महिलाओ पर आंबेडकर जी द्वारा लिखे मूल स्रोतो व लेखो को जानने का बेहतर अवसर मिलता है .इसमें बुध व हिन्दू धर्म में महिलाओ की स्थितियो की तुलना की गई है .कुल मिलाकर कहा जाये तो हिन्दू धर्म में जाति व महिलाओ के प्रति हिंसा को हम मनु व बुध के समय में महिलाओ की स्थितियो से उनके बारे में जान सकते है. अतःयह पुस्तक विभिन कालो में नारियो की स्थितियो के बारे मे बेहतर ज्ञान उप्लब्ध करवाती है.

Reference :

प्रकाशन - पहली बार जनवरी 2013 में प्रकाशित, अगस्त 2013 पुन.र्प्रकाशित

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